जब तक है सुनो साँस तभी तक ये जहाँ है
फिर बा'द में क्या किस को ख़बर कौन कहाँ है
जो शख़्स ज़माने में अगर झुक के रहा है
क़दमों में उसी के तो अरे सारा जहाँ है
कोई भी मोहब्बत का अभी ज़िक्र न करना
क्यूँ पास मिरे बैठा हुआ सारा जहाँ है
ले काम से पहले ही सभी ज़ाफ़ गए हैं
अब आज के इंसान में वो जान कहाँ है
मेहमान हैं दो दिन के सभी जाएँगे इक दिन
कुछ और नहीं भाई यही उम्र-ए-रवाँ है
— Prashant Kumar















