ज़िन्दगी तुझ से मुलाक़ात पे रो देते हैं

फिर तेरे ही दिए हालात पे रो देते हैं

ख़ुद सितम ढा के वो ये रोज़ कहा करते थे
आप तो छोटी सी हर बात पे रो देते हैं

ये ज़रूरी नहीं के बस ख़ुशी का मंज़र हो
है कई लोग, जो बरसात पे रो देते हैं

भूख पानी से मिटा कर, भी न पूरी हो तो
बाप फिर बच्चों की हाजात पे रो देते हैं

देर तन्हाई के बा'द ओस की बूँदे 'आदिल'
देख लगता है के दिन रात पे रो देते हैं

— Aadil Sulaiman

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Zulm Shayari

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