सूखे शजरों की कहानी सुनो
ख़ुद उन्हीं की ही जुबानी सुनो
हम सुख़न-वर अब बहुत कम कहें
जब कहें तो तुम रवानी सुनो
नदियों की ही ये कहानी कहे
तुम कभी जो बहता पानी सुनो
जब शिकायत माँ की बेटे ने की
कुछ हमारी भी तो नानी सुनो
ठीक अब इतना ग़ुरूर है नहीं
इस जहाँ में सब है फ़ानी सुनो
अब तुम्हारे पास होंगे कई
पर नहीं है मेरा सानी सुनो
— Manoj Devdutt















