लुत्फ जब आता नहीं है आशिक़ी से
काम लेते क्यूँ नहीं तब शा'इरी से
दोस्ती का वास्ता क्या दे रहा है
वास्ता क्या है तेरा कुछ दोस्ती से
जिस तरह मैं देखता हूँ यार तुझ को
देखता है कौन इतनी सादगी से
रूठने पे कौन मुझ को है मनाता
सो कोई शिकवा नहीं मुझ को किसी से
— Aadi Ratnam















