बारिश ये इतनी हँस रही है तो सही
हर एक बादल में नमी है तो सही
आलम ये मेरी आरज़ू ही तो है एक
ये आरज़ू मेरी सजी है तो सही
बेचैन बैठा हूँ मैं इस तन्हाई में
इस
में तुम्हारी इक कमी है तो सही
अच्छा मुहब्बत आह इक बीमारी हैं
बीमारी ये मुझ को लगी है तो सही
क्या, "दीप" को वहशी कहा है तुम ने ही
बुद्धि तुम्हारी ये सही है तो सही
— Deep kamal panecha















