@Deepkamal
Deep kamal panecha shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Deep kamal panecha's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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निगाहों के सागरों से पानी छलक न जाए कहीं हमारा
अज़ाब-ए-दिल पे न रोने का टूट ये न जाए यक़ीं हमारा
तो शोख़ी तो देखो उनकी वो बस हमारे ही वास्ते हैं ऐसे
वो चारा-गर बन गए हैं अब पर इलाज करते नहीं हमारा
डूब ही जानी है कश्ती रेत के सहरा में भी दोस्त
तुम जरा हम-राज़ अपनों को बना कर के तो देखो
ये दिल है तेरा या मेरा ख़्याल कुछ भी नहीं
ये शाम है या सवेरा ख़्याल कुछ भी नहीं
याँ इक मैं हूँ जिसको तेरा ही है ख़्याल फ़क़त
वाँ इक तू है जिसको मेरा ख़्याल कुछ भी नहीं
क़लह ख़ामोश करने घर की मन के काले जाएँगे
मुझे डस लेंगे लेकिन फिर भी बिच्छू पाले जाएँगे
मिरे दुश्मन जो आ तो मैं गया ना अपनी करने पे
जनाज़े को भी तेरे शानों के पड़ लाले जाएँगे
इश्क़ का बस यही तो मज़ा है
हिज्र के बाद मिलती क़ज़ा है
मौत से ख़ौफ थोड़ी है, आए
अब तो बे-इश्क़ ये ही रज़ा है
एक घर में पूरा का पूरा जहाँ है
ढूँढते तो हम ही हैं बाहर कहाँ है
क्यूँ मैं ऊपर बैठे पूजूँ उस ख़ुदा को
जब कि घर में बैठी भगवन मेरी माँ है
हम तो वो हैं कोई हम को चाहता ही है नहीं
चाहते भी हम यही है कोई हम को चाहे ही न
अब मैं नहीं जलाता दिया शब अँधेरे में
साया तुम्हारा दिखता है मुझ को चिराग़ में
ये नई चादर जो लाई जा रही है
तेरे बिस्तर पे बिछाई जा रही है
ख़ुश है ना तू ग़ैर रिश्ते में तभी बस
सेज ये तेरी सजाई जा रही है
मेरे ज़ख़्म चीख़ के बताते हाल हैं उन्हें
अपने कान से नहीं जो अपने दिल से बहरे हैं
खोल देता हूँ मैं उनके आगे अपने सारे राज
पर उन्हें तो लगता हैं ये सारे मेरे चेहरे हैं
शब-ए-फ़िराक़ पूरी रात सोना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम तिरे ख़याल बो रहे हैं हम
शब-ए-विसाल पूरी रात जगना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम सुकूँ की नींद सो रहे हैं हम
ये जंग खौफ़-ज़दा यूँ लड़ी नहीं जाती
जो आप होते यहाँ फिर तो अपने घर जाते
दिए हैं ज़ख़्म हमें ज़िन्दगी ने कुछ ऐसे
जो आप एक भी इन में से खाते मर जाते
वो पड़े इस बात पे हमसे उलझ के आज दिन में
आपने कैसे तो कैसे सुब्ह दूजा चाँद देखा
मुझ को गिराने में यूँ मशग़ूल मेरे अपने
मुझ को गिराते ख़ुद अपने आप गिर गए हैं
अब मैं नहीं जलाता दीया शब अँधेरे में
साया तुम्हारा दिखता हैं मुझ को चराग़ में
नज़रों निग़ाहों में उनकी बात कुछ तो होगी
यूँ ही शराब इस बामण ने नहीं चखी है