10
1 Like
"मेरी ज़िंदगी तेरे नाम"
रेज़ा रेज़ा मुझे अपनी साँसें फ़क़त तेरे हवाले करनी है
तू जहाँ अपना पैर रखे वहाँ मुझे अपनी जबीं धरनी है
तेरे बाहें मेरे गले का हार हो, तेरी ख़ुश्बू लिखने के अश'आर हो
ऐसे ही मैं जान-ए-ज़िगर जीता रहूँ ऐसे ही ज़िन्दगी पार हो
एक बाग़ सी हसीन होगी अपनी दुनिया
उस
में तेरे मेरे माँ-पापा बरगद के पेड़ जैसे
सब से बूढ़े सब से उम्र-दराज़ और अनुभव
उन के इन्हीं गुण होंगे जैसे उन की शाख़ें
ये शाख़ें पूरे के पूरे बाग़ को छाँव देगी
बाग़ में अपने जज़्बातों के छोटे फूल होंगे
चंद कलियाँ मनचली की होगी जानाँ
तो कुछ कलियाँ दिलबरी की होगी
एक एक फूल अपने जज़्बात से खिलेगा
इतना ज़ियादा इश्क़ तुझे कहाँ मिलेगा
मैं चाहता हूँ अपने मरने के बा'द भी आबाद रहें
ऐसी दास्ताँ हो अपनी कि सब को ज़बानी याद रहें
तेरे जिस्म की हर लकीर को मैं पढूँ
और तू इस पर शान से नाज़ उठाए
सुब्ह तू आइने के सामने खड़ी हो कर
मेरे आगे हाथ में सिंदूर, सूनी माँग लाए
मैं अपने हाथों से तेरी माँग भरूँ
और तू इतनी ख़ूब-सूरत लगेगी
तुझे देख के जहाँ की हर लड़की
सुहागन बनने की दुआ करेगी
रोज़ शाम को मैं तेरा दामन ओढ़ कर सो जाऊँ
ख़ुदा भी तुझ से रश्क करें इतना तेरा हो जाऊँ
मेरी सारी बे-चैनियाँ तुझ से लिपट के सुकूँ हो जाएगी
तेरी सारी परेशानियाँ मैं अपने सर पर तार लूँगा
तू अव्वल तेरा हर दाव, ख़ुशी हर चीज़ मेरे लिए अव्वल
तेरी परेशानियों संग मैं अपनी ज़िंदगी हँसते गुज़ार लूँगा
Read Fullतू जहाँ अपना पैर रखे वहाँ मुझे अपनी जबीं धरनी है
तेरे बाहें मेरे गले का हार हो, तेरी ख़ुश्बू लिखने के अश'आर हो
ऐसे ही मैं जान-ए-ज़िगर जीता रहूँ ऐसे ही ज़िन्दगी पार हो
एक बाग़ सी हसीन होगी अपनी दुनिया
उस
में तेरे मेरे माँ-पापा बरगद के पेड़ जैसे
सब से बूढ़े सब से उम्र-दराज़ और अनुभव
उन के इन्हीं गुण होंगे जैसे उन की शाख़ें
ये शाख़ें पूरे के पूरे बाग़ को छाँव देगी
बाग़ में अपने जज़्बातों के छोटे फूल होंगे
चंद कलियाँ मनचली की होगी जानाँ
तो कुछ कलियाँ दिलबरी की होगी
एक एक फूल अपने जज़्बात से खिलेगा
इतना ज़ियादा इश्क़ तुझे कहाँ मिलेगा
मैं चाहता हूँ अपने मरने के बा'द भी आबाद रहें
ऐसी दास्ताँ हो अपनी कि सब को ज़बानी याद रहें
तेरे जिस्म की हर लकीर को मैं पढूँ
और तू इस पर शान से नाज़ उठाए
सुब्ह तू आइने के सामने खड़ी हो कर
मेरे आगे हाथ में सिंदूर, सूनी माँग लाए
मैं अपने हाथों से तेरी माँग भरूँ
और तू इतनी ख़ूब-सूरत लगेगी
तुझे देख के जहाँ की हर लड़की
सुहागन बनने की दुआ करेगी
रोज़ शाम को मैं तेरा दामन ओढ़ कर सो जाऊँ
ख़ुदा भी तुझ से रश्क करें इतना तेरा हो जाऊँ
मेरी सारी बे-चैनियाँ तुझ से लिपट के सुकूँ हो जाएगी
तेरी सारी परेशानियाँ मैं अपने सर पर तार लूँगा
तू अव्वल तेरा हर दाव, ख़ुशी हर चीज़ मेरे लिए अव्वल
तेरी परेशानियों संग मैं अपनी ज़िंदगी हँसते गुज़ार लूँगा
9
2 Likes
ये सर्दी के मौसम की बारिश
मिरी ही है शायद गुज़ारिश
मिरी ही है शायद गुज़ारिश
न आए कहीं चैन मुझ को
सो बरसात ने की है साज़िश
रहे तू सदा साथ मेरे
ये मेरी ग़ज़ल की है ख़्वाहिश
कमर पे दिया तिल ख़ुदा ने
तिरे हुस्न की, की नुमाइश
खफ़ा करती कह के मुझे झूट
जुदा करने की करती साज़िश
ये क्यूँ करते हो पूछा मैं ने
कहें आदतों की है वर्ज़िश
मुझे रहना है उस के दिल में
लगातार करता हूँ कोशिश
यक़ीं कैसे ख़ुद पे दिलाऊँ
वो तोड़े ज़रा अपनी बंदिश
वो इक बार अपना कहें बस
करूँगा उमर भर परस्तिश
ज़रा देख इस
में उतर के
मुहब्बत बड़ी प्यारी लग़्ज़िश
नहीं बात की आज उस से
है कुछ "दीप" के दिल में रंज़िश
8
1 Like
7
1 Like
टूट-फूट कर हर दम अब बिखर चुका हूँ मैं
हर सितम जहान-ए-ग़म से गुजर चुका हूँ मैं
हर सितम जहान-ए-ग़म से गुजर चुका हूँ मैं
है नहीं मेरे ख़्वाबों में ख़याल अब तेरा
क्या गिला किसी से आहिस्ता मर चुका हूँ मैं
सोच में हो तुम हर दम मेरे या'नी सब कुछ हो
वाकई तो कैसे तुम से उतर चुका हूँ मैं
रूह ख़्वाब साँसे धड़कन ख़याल सब मेरे
सिर्फ़ नाम पे तेरे जानाँ धर चुका हूँ मैं
मुझ को मुहब्बत में चाहते हो करना ख़त्म
पहले भी जाँ इस रस्ते से गुज़र चुका हूँ मैं
पास मत रहो चाहे दूर भी चले जाओ
पर तुम्हें तो अपनी पलकों में भर चुका हूँ मैं
बस नहीं मेरा नफरत करना चाहूँ गर तुम से
ख़ुद को इश्क़ में पागल इतना कर चुका हूँ मैं
चलना ही पड़ेगा अब उस के गाँव की ज़ानिब
मौत के लिए ख़ुद ही जो सँवर चुका हूँ मैं
ज़िन्दगी में काफी है बस सुख़न-वरी मुझ को
बाक़ी सारी इस दुनिया से मुकर चुका हूँ मैं
दोस्त उम्र भर पछताना मुझे पड़ेगा ही
दीप को जुदा ख़ुदस कर अगर चुका हूँ मैं
6
1 Like
5
1 Like
4
3 Likes
1
1 Like









