ख़ाली बैठे हो तो इक काम मेरा कर दो ना
मुझ को अच्छा सा कोई ज़ख़्म अदा कर दो ना
ध्यान से पंछियों को देते हो दाना पानी
इतने अच्छे हो तो पिंजरे से रिहा कर दो ना
जब क़रीब आ ही गए हो तो उदासी कैसी
जब दिया दे ही रहे हो तो जला कर दो ना
— Zubair Ali Tabish
मुझ को अच्छा सा कोई ज़ख़्म अदा कर दो ना
ध्यान से पंछियों को देते हो दाना पानी
इतने अच्छे हो तो पिंजरे से रिहा कर दो ना
जब क़रीब आ ही गए हो तो उदासी कैसी
जब दिया दे ही रहे हो तो जला कर दो ना
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