चल दिए फेर कर नज़र तुम भी
ग़ैर तो ग़ैर थे मगर तुम भी
ये गली मेरे दिलरुबा की है
दोस्तों ख़ैरियत इधर तुम भी
मुझ पे लोगों के साथ हँसते हो
लोग रोएँगे ख़ास कर तुम भी
मुझ को ठुकरा दिया है दुनिया ने
मैं तो मर जाऊँगा अगर तुम भी
उस की गाड़ी तो जा चुकी 'ताबिश'
अब उठो जाओ अपने घर तुम भी
— Zubair Ali Tabish















