भीड़ तो ऊँचा ही सुनेगी दोस्त
मेरी आवाज़ गिर पड़ेगी दोस्त
मेरी तक़दीर तेरी खिड़की है
मेरी तक़दीर कब खुलेगी दोस्त
गाँव मेरा बहुत ही छोटा है
तेरी गाड़ी नहीं रुकेगी दोस्त
दोस्ती लफ़्ज़ में ही दो है दो
सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
— Zubair Ali Tabish
मेरी आवाज़ गिर पड़ेगी दोस्त
मेरी तक़दीर तेरी खिड़की है
मेरी तक़दीर कब खुलेगी दोस्त
गाँव मेरा बहुत ही छोटा है
तेरी गाड़ी नहीं रुकेगी दोस्त
दोस्ती लफ़्ज़ में ही दो है दो
सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
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