कौन किस की शक्ल में रहता है अब बोलो ज़मीं पर

जानवर की शक्ल में इंसान रहते थे यहीं पर

छीन लो सब कुछ मगर ये याद रखना ओ सितमगर
तुम मिटाओगे जहाँ आसेब उभरेगा वहीं पर

क्यूँ दुआएँ भेज दी जाती हैं वापस आसमाँ से
उन दु'आओं में मिली हैं बद दुआएँ भी कहीं पर

जानते हैं सब कि दामन साफ़ होगा इस लिए भी
देख कर हैरान हैं सब ख़ून मेरे आस्तीं पर

— Tarun Pandey

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