कुछ नहीं तेरी सुनने वाले अब

तू लगा ले ज़बाँ पे ताले अब

सब के सब कब तलक यूँ बैठोगे
पाँव घर से कोई निकाले अब

जितना चाहे तराश डाले तू
ख़ुद को तेरे किया हवाले अब

ज़ुल्म तुम को नज़र नहीं आता
साफ़ आँखों के कर लो जाले अब

ज़ाइक़ा ही बिगड़ गया मुँह का
ऐसे महँगे हुए निवाले अब

मौत अब जान ले के छोड़ेगी
है कोई जो तुझे बचा ले अब

बुज़दिली अब नहीं दिखाऍंगे
हो गए हैं ज़फर जियाले अब

— Zafar Siddqui

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