माहौल बे-मज़ा है तेरे प्यार के बग़ैर
कैसे पिए शराब कोई यार के बग़ैर
ये इश्क़ भी है कितना अनोखा मु'आमला
इक़रार के बग़ैर न इनकार के बग़ैर
फूलों से गर बहार ने भर भी दिया तो क्या
दामन मेरा उदास रहा ख़ार के बग़ैर
फ़ुर्सत मिले तो पूछ कभी उन का हाल भी
जो लोग जी रहे हैं तेरे प्यार के बग़ैर
उस शोख़ से बिछड़ के 'ज़फ़र अपनी ज़िंदगी
जैसे मकान हो कोई दीवार के बग़ैर
— Zafar Gorakhpuri















