अजी छोड़िए भी ये नफ़रत की बातें
बहुत ही बुरी हैं सियायत की बातें
उदासी की चादर लपेटे पड़ा हूँ
करे कोई आके मुहब्बत की बातें
तेरे हुस्न का ज़िक्र होगा यक़ीनन
चलेंगी जहाँ भी क़यामत की बातें
— Zeeshan kaavish
बहुत ही बुरी हैं सियायत की बातें
उदासी की चादर लपेटे पड़ा हूँ
करे कोई आके मुहब्बत की बातें
तेरे हुस्न का ज़िक्र होगा यक़ीनन
चलेंगी जहाँ भी क़यामत की बातें
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