कितना मुश्किल था ये रस्ता कौन लिखेगा
पूरी बात और पूरा क़िस्सा कौन लिखेगा
दिन और रात के आधे आधे बटवारे में
कितना कम था किस का हिस्सा कौन लिखेगा
किन हाथों ने कैसे कैसे पत्थर काटे
कैसे दिन का बोझ उठाया कौन लिखेगा
कितनी देर को हरियाली ने आँखें खोलीं
कितनी देर को बादल बरसा कौन लिखेगा
जंगल में गुम हो जाने वाले रस्ते पर
कितनी धूप थी कितना साया कौन लिखेगा
शहर जला तो किस ने उस की राख समेटी
कितना था किस का सरमाया कौन लिखेगा
गिरती दीवारों में साँस कहाँ थी बाक़ी
और कहाँ तक बिखरा मलबा कौन लिखेगा
— Yasmeen Hameed















