दर्द उस का उभर रहा होगा
सारा नश्शा उतर रहा होगा
बंद आँखों की सर्द झीलों में
अक्स उस का सँवर रहा होगा
रात से सुल्ह हो रही होगी
उस का एहसास मर रहा होगा
— Yaqoob Rahi
सारा नश्शा उतर रहा होगा
बंद आँखों की सर्द झीलों में
अक्स उस का सँवर रहा होगा
रात से सुल्ह हो रही होगी
उस का एहसास मर रहा होगा
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