मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता

पराया जुर्म अपने नाम लिखवाना नहीं आता

मुझे ऐ नाख़ुदा आख़िर किसी को मुँह दिखाना है
बहाना कर के तन्हा पार उतर जाना नहीं आता

मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा
मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता

दिल-ए-बे-हौसला है इक ज़रा सी ठेस का मेहमाँ
वो आँसू क्या पिएगा जिस को ग़म खाना नहीं आता

सरापा राज़ हूँ मैं क्या बताऊँ कौन हूँ क्या हूँ
समझता हूँ मगर दुनिया को समझाना नहीं आता

— Yagana Changezi

More by Yagana Changezi

Other ghazal from the same pen

See all from Yagana Changezi →

Sad Shayari Collection

Shers of sad shayari collection.

All Sad Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling