देती है वहशत-ए-दिल फिर मुझे ता'बीर-ए-बहार
जल्वा-गर ख़्वाब में रहने लगी तस्वीर-ए-बहार
सिलसिला छिड़ गया फिर दिल की गिरफ़्तारी का
फिर नसीम आज हिलाने लगी ज़ंजीर-ए-बहार
हुस्न और इश्क़ की दुनिया में पड़ेगी हलचल
फ़ित्ना-अंगेज़-ओ-जुनूँ-ख़ेज़ है तासीर-ए-बहार
तंग आने लगे दीवाने गरेबानों से
कुछ तो ऐ दस्त जुनूँ चाहिए तदबीर-ए-बहार
दौड़ी जाती है घटा सू-ए-चमन बादा-कशो
पर्दा-ए-ग़ैब से होने लगी तदबीर-ए-बहार
— Yagana Changezi















