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Piyush Shrivastava

Top 10 of Piyush Shrivastava

Piyush Shrivastava

Top 10 of Piyush Shrivastava

    तवज्जोह दी न जीते जी बुज़ुर्गों को कभी जिस ने
    चढ़ाने चल दिया वो हार उन की मौत आने पर

    छिले हैं पाँव माँ के राह में चलते हुए फिर भी
    लगी है भूख वो हर रोज़ बच्चों की मिटाने पर
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    Piyush Shrivastava
    10
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    शाम जो उन को साथ बैठाया
    आसमाँ ने भी नूर बरसाया

    साज़िशे सारे तारों ने की जब
    अपनी ज़ुल्फ़ों को उस ने लहराया

    चाँद भी जलने सा लगा फिर जब
    उस ने खुलके ज़रा सा मुस्काया
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    Piyush Shrivastava
    9
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    ज़बाँ मीठी तो आँखों में समुंदर ले के फिरते हैं
    यहाँ के लोग शैतानी का मंतर ले के फिरते हैं

    फ़रेबी सी ये दुनिया हो रही है ग़ैर तो छोड़ो
    यहाँ तो अपने ही हाथों में ख़ंजर ले के फिरते हैं
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    Piyush Shrivastava
    8
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    रब के बनाए ख़ून के रिश्ते हैं और ये
    उन रिश्तों में हमेशा से तकरार करती है

    दौलत की लत लगी है ज़माने के लोगों को
    लत है कि अच्छे खासों को बीमार करती है
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    Piyush Shrivastava
    7
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    आजकल सुकून भी हुज़ूर छीन लेते हैं
    झूठे कुछ रिवाज़ भी सुरूर छीन लेते हैं

    लोग क्या कहेंगे अब ज़माने भर के हम से ये
    बोलकर हमारा ही उबूर छीन लेते हैं

    झूठी महफ़िलें है सब यहाँ की, चंद बातों में
    लोग हम से चेहरे का भी नूर छीन लेते हैं
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    Piyush Shrivastava
    6
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    छोड़ कर के हम को यूँ तन्हा वो भी पछताई होगी
    सोच कर रुस्वाई उस की आँख भी भर आई होगी

    काँपी तो होगी हथेली उस की भी, तब जाके मेहँदी
    ग़ैर की ख़ातिर ही उस ने हाथों में रचवाई होगी
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    Piyush Shrivastava
    5
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    ज़िंदगी में अपनी हम कुछ फेर लिख दें
    हार में रुस्वाई का कुछ ढ़ेर लिख दें

    तुम हमारी कुछ बुराई लिखते जाओ
    हाल पर हम अपने कोई शे'र लिख दें
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    Piyush Shrivastava
    4
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    कुछ ग़ैरों ने लूटा हमें लूटा हमें कुछ अपनों ने
    नींदें रहीं बस रातों की वो लूट ली कुछ सपनों ने
    Piyush Shrivastava
    3
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    एक ख़्वाब
    लाल बिंदी माथा चू
    में ख़ुशबू महकाए तन
    देख उन्हें ख़्वाबों में खिलता हो जैसे मन

    चाँद सी प्यारी सूरत झीलों सी गहरी आँखें
    शहद से हैं लब उन के मीठी सी उन की बातें

    ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
    गुज़रता हैं न दिन न ही गुज़रा करती रातें

    पंख फैला उड़ती वो कौन तितली न जाने
    फूल हम भी बन जाते जब आती वो महकाने

    दूर से देखा करती हैं वो ज़ुल्फ़ों को लहराए
    क़त्ल करती हैं मानो कोई उन को समझाए

    है परी कोई या है वो कोई जादूगरनी
    दिल हमारा मंत्रित कर के वश में करती जाए

    ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
    गुज़रता है न दिन न ही गुज़रा करती रातें
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    Piyush Shrivastava
    2
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    पहले सन्नाटा रहा फिर आँधी आई
    लुट गया सब मेरा फिर बरबादी आई

    मेरे ख़्वाबों का मकाँ भी हिल गया तब
    जब फ़रेबी की हवा तूफ़ानी आई
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    Piyush Shrivastava
    1
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