आजकल सुकून भी हुज़ूर छीन लेते हैं
झूठे कुछ रिवाज़ भी सुरूर छीन लेते हैं
लोग क्या कहेंगे अब ज़माने भर के हम से ये
बोलकर हमारा ही उबूर छीन लेते हैं
झूठी महफ़िलें है सब यहाँ की, चंद बातों में
लोग हम से चेहरे का भी नूर छीन लेते हैं
— Piyush Shrivastava
झूठे कुछ रिवाज़ भी सुरूर छीन लेते हैं
लोग क्या कहेंगे अब ज़माने भर के हम से ये
बोलकर हमारा ही उबूर छीन लेते हैं
झूठी महफ़िलें है सब यहाँ की, चंद बातों में
लोग हम से चेहरे का भी नूर छीन लेते हैं
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