अगर मर ही न पाए तुम मुहब्बत में
    तो फिर मर क्यूँ नहीं जाते नदामत में

    मैं उसके नाम से चिढ़ने लगा हूँ अब
    दुखा है दिल मुहब्बत की अदालत में

    हमेशा टाल देते हो यही कह कर
    कभी तो हम करेंगे बात फ़ुर्सत में

    ख़ुदा के सामने सर फोड़ता हूँ मैं
    असर अब है नहीं मेरी इबादत में

    लुटेरे भी हवा में उड़ रहे हैं अब
    नशा काफ़ी गज़ब का है सियासत में

    Piyush Nishchal
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    जानता हूँ कि बर्बाद हूँ मैं सो अब
    तू मिरा ग़म मना ले नसीहत न दे

    Piyush Nishchal
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    जो कभी काम आए न इमदाद को
    मुफ़्लिसी की उन्हें बस दुआएँ लगें

    Piyush Nishchal
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    यकायक मरना है तो ख़ुद-कुशी कर लो
    अगर क़िस्तों में तो फिर दिल्लगी कर लो

    नहीं मरना है ज़िंदा भी नहीं रहना
    मिरी मानो तो तुम फिर मयकशी कर लो

    Piyush Nishchal
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    मैं शहर से तेरे निकल कर अपनी बस्ती जाउँगा
    मैं जाउँगा मौजूदगी में तेरी जल्दी जाउँगा

    मैं जो तुम्हारी हर अज़िय्यत सह के अब तक ज़िंदा हूँ
    जिस दिन गले से तुम लगाओगी मैं मर ही जाउँगा

    Piyush Nishchal
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    हमारे मुल्क की ये दास्ताँ है
    सियासत अब लहू पीने लगी है

    Piyush Nishchal
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    हिफ़ाज़त करने वाले लोग थे वो
    हनन जिनका सियासत ने किया है

    Piyush Nishchal
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    मिरे शब्दों को पढ़के ये समझ लो तुम
    किसी के सुर्ख़ होंठो की कहानी है

    Piyush Nishchal
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    मुहब्बत, वस्ल, नफ़रत, हिज्र, रेहलत सब
    मिले हैं तो मैं जाकर अब मुकम्मल हूँ

    Piyush Nishchal
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    ख़ुश रहे ता-उम्र तू अपनी निशात-ए-ज़िंदगी में
    तेरे पथ ने ओढ़ी है झड़ते हुए फूलों की चादर

    Piyush Nishchal
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