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इस दीवाने दिल को देखो क्या शेवा अपनाए है
उस पर ही विश्वास करे है जिस से धोका खाए है
उस पर ही विश्वास करे है जिस से धोका खाए है
सारा कलेजा कट कट कर जब अश्कों में बह जाए है
तब कोई फ़रहाद बने है तब मजनूँ कहलाए है
मैं जो तड़प कर रोऊँ हूँ तो ज़ालिम यूँ फ़रमाए है
इतना गहरा घाव कहाँ है नाहक़ शोर मचाए है
तुम ने मुझ को रंज दिया तो इस में तुम्हारा दोश नहीं
फूल भी काँटा बन जाए है वक़्त बुरा जब आए है
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बड़े अदब से ग़ुरूर-ए-सितम-गराँ बोला
जब इंक़लाब के लहजे में बे-ज़बाँ बोला
जब इंक़लाब के लहजे में बे-ज़बाँ बोला
तकोगे यूँही हवाओं का मुँह भला कब तक
ये ना-ख़ुदाओं से इक रोज़ बादबाँ बोला
चमन में सब की ज़बाँ पर थी मेरी मज़लूमी
मिरे ख़िलाफ़ जो बोला तो बाग़बाँ बोला
यही बहुत है कि ज़िंदा तो हो मियाँ-साहब
ज़माना सुन के मिरे ग़म की दास्ताँ बोला
हिसार-ए-जब्र में ज़िंदा बदन जलाए गए
किसी ने दम नहीं मारा मगर धुआँ बोला
असर हुआ तो ये तक़रीर का कमाल नहीं
मिरा ख़ुलूस मुख़ातब था मैं कहाँ बोला
कहा न था कि नवाज़ेंगे हम 'हफ़ीज़' तुझे
उड़ा के वो मिरे दामन की धज्जियाँ बोला
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