उस को इक दिन तो जाना था
मुझ से क्या रिश्ता क्या नाता
मुझ से क्या रिश्ता क्या नाता
बस पल-दो-पल को ठहरा था
पल-दो-पल हँसते गुज़रा था
मैं तब भी सोचा करती थी
ये साथ बड़ा लम्हाती है
जज़्बे की थोड़ी सी गर्मी
जलते छाले बन जाती है
इस बात को बीते साल हुए
फिर दुनिया है पहले जैसी
सब रंग वही रा'नाई वही
सब हुस्न वही पर क्या कीजे
सच्चे थे मिरे सब अंदेशे
अब भी यूँ ही बैठे-बैठे
याद आए तो दिल दुख जाता है
Read Fullपल-दो-पल हँसते गुज़रा था
मैं तब भी सोचा करती थी
ये साथ बड़ा लम्हाती है
जज़्बे की थोड़ी सी गर्मी
जलते छाले बन जाती है
इस बात को बीते साल हुए
फिर दुनिया है पहले जैसी
सब रंग वही रा'नाई वही
सब हुस्न वही पर क्या कीजे
सच्चे थे मिरे सब अंदेशे
अब भी यूँ ही बैठे-बैठे
याद आए तो दिल दुख जाता है
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सनसनाहटों के साथ
गड़गड़ाहटो के साथ
गड़गड़ाहटो के साथ
आ गया!
पवन-रथ पे बैठ कर
मेरा मेघ देवता
दोश पर हवाओं के
बाल उड़ाता हुआ
उस का जामुनी बदन
आसमाँ पे छा गया
दूर तक गरज हुई
ज़मीं दहलने लगी
आसमाँ सिमट गया
बड़ी घन-गरज के साथ
टूट कर बरस पड़ा
और मैं आँख मूँद कर
हाथ पसारे हुए
दौड़ती चली गई
अंग से लगा रही
नील उस के अंग का
मैं कि बिंत-ए-जिज्र हूँ
मुझ में ऐसी प्यास है
मैं कि मेरे वास्ते
वस्ल भी फ़िराक़ है
मुझ में ऐसी आग है
मेघ-रस में भीग कर
हाँफती खड़ी खड़ी
कह रहा है दिल मेरा
यही है
मधुर मिलन की घड़ी
Read Fullपवन-रथ पे बैठ कर
मेरा मेघ देवता
दोश पर हवाओं के
बाल उड़ाता हुआ
उस का जामुनी बदन
आसमाँ पे छा गया
दूर तक गरज हुई
ज़मीं दहलने लगी
आसमाँ सिमट गया
बड़ी घन-गरज के साथ
टूट कर बरस पड़ा
और मैं आँख मूँद कर
हाथ पसारे हुए
दौड़ती चली गई
अंग से लगा रही
नील उस के अंग का
मैं कि बिंत-ए-जिज्र हूँ
मुझ में ऐसी प्यास है
मैं कि मेरे वास्ते
वस्ल भी फ़िराक़ है
मुझ में ऐसी आग है
मेघ-रस में भीग कर
हाँफती खड़ी खड़ी
कह रहा है दिल मेरा
यही है
मधुर मिलन की घड़ी
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बैठा है मेरे सामने वो
जाने किसी सोच में पड़ा है
जाने किसी सोच में पड़ा है
अच्छी आँखें मिली हैं उस को
वहशत करना भी आ गया है
बिछ जाऊँ मैं उस के रास्ते में
फिर भी क्या इस से फ़ाएदा है
हम दोनों ही ये तो जानते हैं
वो मेरे लिए नहीं बना है
मेरे लिए उस के हाथ काफ़ी
उस के लिए सारा फ़ल्सफ़ा है
मेरी नज़रों से है परेशाँ
ख़ुद अपनी कशिश से ही ख़फ़ा है
सब बात समझ रहा है लेकिन
गुम-सुम सा मुझ को देखता है
जैसे मेले में कोई बच्चा
अपनी माँ से बिछड़ गया है
उस के सीने में छुप के रोऊँ
मेरा दिल तो ये चाहता है
कैसा ख़ुश-रंग फूल है वो
जो उस के लबों पे खिल रहा है
या रब वो मुझे कभी न भूले
मेरी तुझ से यही दुआ है
Read Fullवहशत करना भी आ गया है
बिछ जाऊँ मैं उस के रास्ते में
फिर भी क्या इस से फ़ाएदा है
हम दोनों ही ये तो जानते हैं
वो मेरे लिए नहीं बना है
मेरे लिए उस के हाथ काफ़ी
उस के लिए सारा फ़ल्सफ़ा है
मेरी नज़रों से है परेशाँ
ख़ुद अपनी कशिश से ही ख़फ़ा है
सब बात समझ रहा है लेकिन
गुम-सुम सा मुझ को देखता है
जैसे मेले में कोई बच्चा
अपनी माँ से बिछड़ गया है
उस के सीने में छुप के रोऊँ
मेरा दिल तो ये चाहता है
कैसा ख़ुश-रंग फूल है वो
जो उस के लबों पे खिल रहा है
या रब वो मुझे कभी न भूले
मेरी तुझ से यही दुआ है
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ये किस के आँसुओं ने उस नक़्श को मिटाया
जो मेरे लौह-ए-दिल पर तू ने कभी बनाया
जो मेरे लौह-ए-दिल पर तू ने कभी बनाया
था दिल जब उस पे माइल था शौक़ सख़्त मुश्किल
तर्ग़ीब ने उसे भी आसान कर दिखाया
इक गर्द-बाद में तू ओझल हुआ नज़र से
इस दश्त-ए-बे-समर से जुज़ ख़ाक कुछ न पाया
ऐ चोब-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा वो बाद-ए-शौक़ क्या थी
मेरी तरह बरहना जिस ने तुझे बनाया
फिर हम हैं नीम-शब है अंदेशा-ए-अबस है
वो वाहिमा कि जिस से तेरा यक़ीन आया
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ये पैरहन जो मेरी रूह का उतर न सका
तो नख़-ब-नख़ कहीं पैवस्त रेशा-ए-दिल था
तो नख़-ब-नख़ कहीं पैवस्त रेशा-ए-दिल था
मुझे मआल-ए-सफ़र का मलाल क्यूँकर हो
कि जब सफ़र ही मेरा फ़ासलों का धोका था
मैं जब फ़िराक़ की रातों में उस के साथ रही
वो फिर विसाल के लम्हों में क्यूँ अकेला था
वो वास्ते की तेरा दरमियाँ भी क्यूँ आए
ख़ुदा के साथ मेरा जिस्म क्यूँ न हो तन्हा
सराब हूँ मैं तेरी प्यास क्या बुझाऊँगी
इस इश्तियाक़ से तिश्ना ज़बाँ क़रीब न ला
सराब हूँ कि बदन की यही शहादत है
हर एक उज़्व में बहता है रेत का दरिया
जो मेरे लब पे है शायद वही सदाक़त है
जो मेरे दिल में है उस हर्फ़-ए-राएगाँ पे न जा
जिसे मैं तोड़ चुकी हूँ वो रौशनी का तिलिस्म
शुआ-ए-नूर-ए-अज़ल के सिवा कुछ और न था
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