ये दुनिया ग़म तो देती है शरीक-ए-ग़म नहीं होती
किसी के दूर जाने से मोहब्बत कम नहीं होती
मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है
मैंने उसको इतना देखा जितना देखा जा सकता था
लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था