वो टुकड़ा रात का बिखरा हुआ सा
अभी तक दिन पे है ठहरा हुआ सा
अभी तक दिन पे है ठहरा हुआ सा
उदासी एक लम्हे पर गिरी थी
सदी का बोझ है पसरा हुआ सा
इधर खिड़की में था मायूस चेहरा
उधर भी चाँद है उतरा हुआ सा
करे है शोर यूँ सीने में ये दिल
समूचा जिस्म है बहरा हुआ सा
ये किन नज़रों से मुझ को देखते हो
रहूँ हर दम सजा-संवरा हुआ सा
सुखाने ज़ुल्फ़ वो आए हैं छत पर
है सूरज आज फिर सहरा हुआ सा
लिखा उस नाम का पहला ही अक्षर
मुकम्मल पेज है चेहरा हुआ सा
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उजली उजली बर्फ़ के नीचे पत्थर नीला नीला है
तेरी यादों में ये सर्द दिसम्बर नीला नीला है
तेरी यादों में ये सर्द दिसम्बर नीला नीला है
दिन की रंगत ख़ैर गुज़र जाती है तेरे बिन लेकिन
कत्थई कत्थई रातों का हर मंज़र नीला नीला है
दूर इधर खिड़की पर बैठी सोच रही हो मुझ को क्या
चाँद उधर छत पर आया है थक कर नीला नीला है
तेरी नीली चुनरी ने क्या हाल किया बाग़ीचे का
नारंगी फूलों वाला गुल-मोहर नीला नीला है
बादल के पीछे का सच अब खोला तेरी आँखों ने
तू जो निहारे रोज़ उसे तो अंबर नीला नीला है
हुस्न भले हो रौशन तेरा लाल गुलाबी रंग लिए इश्क़ का तेरे परतव लेकिन दिल पर नीला नीला है
इक तो तू भी साथ नहीं है ऊपर से ये बारिश उफ़
घर तो घर सारा का सारा दफ़्तर नीला नीला है
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