याद तब करते हो करने को न हो जब कुछ भी
और कहते हो तुम्हें इश्क़ है मतलब कुछ भी
और कहते हो तुम्हें इश्क़ है मतलब कुछ भी
अब जो आ आ के बताते हो वो शख़्स ऐसा था
जब मेरे साथ था वो क्यूँ न कहा तब कुछ भी
वक्फ़े-वक्फ़े से मुझे देखने आते रहना
हिज्र की शब है सो हो सकता है इस शब कुछ भी
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं
लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं
लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं
नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है
मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
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निकाल लाया हूँ एक पिंजरे से इक परिंदा
अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है
अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है
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