10
77 Likes
9
70 Likes
8
59 Likes
अकेलेपन से कहाँ तालमेल होता है
खिलाड़ी इश्क़ में दो हों तो खेल होता है
खिलाड़ी इश्क़ में दो हों तो खेल होता है
न लेना इश्क़ के पर्चे में सौ से कम नंबर
यहाँ निनानवे वाला भी फेल होता है
5
67 Likes
बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं
हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं
हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं
तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू
तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं
अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान
कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं
वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है
क्यूँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं
दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँ फेंकती है जाल
हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं
वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के
'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
4
197 Likes










