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Dinesh Kumar Drouna

Top 10 of Dinesh Kumar Drouna

Dinesh Kumar Drouna

Top 10 of Dinesh Kumar Drouna

    कभी कभी ही वो मुझ से नहीं झगड़ता है
    वगर्ना देखता है और टूट पड़ता है

    मिरी नज़र से तो है दूर वो बहुत लेकिन
    मिरे ख़याल के हाँ आस-पास पड़ता है

    हरा-भरा तो बहुत था वो बाँस का जंगल
    किसे पता था मगर आग भी पकड़ता है

    यक़ीन उस की रिफ़ाक़त का कर रहा हूँ मैं
    कि जिस का काम मेरे दुश्मनों से पड़ता है

    यहीं पे रब्त में आता है एक दोराहा
    यहीं पे आ के मिरा राब्ता बिगड़ता है

    मैं ऐसी जंग में हूँ एक ऐसी जंग जहाँ
    मिरा ख़ुलूस ही मेरे ख़िलाफ़ लड़ता है
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    Dinesh Kumar Drouna
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    आईने के इस तरफ़ से उस तरफ़ आते हुए
    उम्र गुज़री है ख़ुदी को ख़ुद से मिलवाते हुए

    यूँ समझ लीजे हमारी इश्क़ में बेचारगी
    डूब जाना था हमें तैराकियाँ आते हुए

    जाने उस शब क्या हुआ था मेरी अक़्ल-ओ-होश को
    ख़ुद बहकने लग गया था उस को समझाते हुए

    बे-सबब कुछ भी नहीं था बे-सबब तन्क़ीद भी
    वो मिटाए जा रहा था नक़्श-ए-पा जाते हुए

    आप के पीछे गुज़ारी ज़िंदगी मत पूछिए
    काटनी थी काट ली रोते हुए गाते हुए

    अब न लीजे नाम उस का दिल कि जिस की ज़िद किए
    सो गया है थक-थका कर रोते चिल्लाते हुए
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    Dinesh Kumar Drouna
    9
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    उम्र भर साथ साथ आता है
    वो जो उजलत में छूट जाता है

    रूह की बात करने वाले तू
    जिस्म किस के लिए बचाता है

    एक तो तैरना नहीं आता
    और फिर कश्तियाँ चलाता है

    बा'द मुद्दत के मिल रहा है वो
    देखिए बात क्या बनाता है

    जाने क्या हादिसा हुआ था कि
    दिल चराग़ों से ख़ौफ़ खाता है

    मेरा अंदाज़ और कुछ है और
    आईना और कुछ दिखाता है

    वो कभी याद तो नहीं करता
    हाँ मगर याद ख़ूब आता है

    तुम को किस ने कहा पिलाने को
    हुस्न तो तिश्नगी बढ़ाता है

    जाने क्या फूँकने की ज़िद है उसे
    रात भर तीलियाँ जलाता है
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    Dinesh Kumar Drouna
    8
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    सफ़र को फिर वहीं ले जा रहे हैं
    ख़ुतूत उन के उन्हें लौटा रहे हैं

    हमारी मौत के क्या फ़ाएदे हैं
    हम अपने आप को समझा रहे हैं

    कहाँ के राहबर कैसी मसाफ़त
    हमें ये लोग बस टहला रहे हैं

    ग़ज़ल शेर-ओ-सुख़न कुछ भी नहीं बस
    हम अपने आप से बतला रहे हैं

    ज़रा सी बात है कैसा तमाशा
    उन्हें जाना था और वो जा रहे हैं

    सितम ये है कि जिस को छोड़ना है
    उसी को साथ में ले जा रहे हैं

    ये कह कर जो भी चाहोगे वो होगा
    वो अपनी बात ही मनवा रहे हैं

    वो जो रहते हैं इक दरिया किनारे
    वो हम को तिश्नगी समझा रहे हैं

    उजालों के लिए खोली थी खिड़की
    मगर घर से अँधेरे जा रहे हैं
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    Dinesh Kumar Drouna
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    मासूम दिल की हसरतें लफ़्ज़ों में ढाल कर
    रखे हैं हम ने धूप में जुगनू निकाल कर

    है शिद्दत-ए-तलब का मिरे अलमिया यही
    रख दे न मेरी प्यास समुंदर उबाल कर

    चलती नहीं मोहब्बतों में जल्द-बाज़ियाँ
    होते नहीं ये फ़ैसले सिक्के उछाल कर

    वा'दों के जो खिलौने थमा कर गया था तू
    मैं ने भी रख दिए हैं कहीं पर सँभाल कर

    फिर यूँ हुआ कि सब्ज़ हो उठा वो रेगज़ार
    निकले जब उन के हाथ में हम हाथ डाल कर

    तुझ से जिरह करूँगा मगर शर्त है यही
    जिस का जवाब तू हो मुझे वो सवाल कर

    इक नाज़नीं का दिल हुआ है गुम-शुदा कहीं
    और हम खड़े हैं सामने जेबें निकाल कर
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    Dinesh Kumar Drouna
    6
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    ये तर्क-ए-रब्त तो फ़र्दा पे टाल रखना था
    किसी भी हाल में रिश्ता बहाल रखना था

    दिलों की तल्ख़ियाँ सड़कों पे खींच लाया तू
    पुराने रब्त का कुछ तो ख़याल रखना था

    ये उस की सोच है अपनी वफ़ा करे न करे
    तुम्हें तो अपना कलेजा निकाल रखना था

    यूँ गुफ़्तुगू का कोई सिलसिला बढ़ाने को
    हमें जवाब में फिर से सवाल रखना था

    मिरे ख़याल की जुम्बिश भी भाँपने वाले
    तुम्हारा नाम तो हम को ग़ज़ाल रखना था

    मैं उठा और तिरे पास कोई बैठ गया
    मिरी ये भूल थी मुझ को रूमाल रखना था
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    Dinesh Kumar Drouna
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    निगाहों को निशाना चाहिए था
    कोई पागल दीवाना चाहिए था

    ये माना थे ख़फ़ा हम फिर भी लेकिन
    तुम्हें नज़दीक आना चाहिए था

    मैं अपने जब्र पर हैरान हूँ ख़ुद
    मुझे तो टूट जाना चाहिए था

    मुझे पा कर रवाँ सा हो रहे हो
    तो क्या तुम को ज़माना चाहिए था

    वो क़िस्सा याद रखने का नहीं है
    सुना और भूल जाना चाहिए था

    जिसे गर जानना हो दर्द क्या है
    किसी से दिल लगाना चाहिए था

    भुलाने की यही इक शर्त भी थी
    मुझे वो याद आना चाहिए था

    वो जो आगाह करता फिर रहा है
    उसी को आज़माना चाहिए था

    ज़रा सी बात और तर्क-ए-तअ'ल्लुक़
    तुम्हें तो बस बहाना चाहिए था
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    Dinesh Kumar Drouna
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    साँस का झोंका भी अब तूफ़ान होता जाएगा
    हर नफ़स थोड़ा बहुत नुक़सान होता जाएगा

    चाप कानों से किसी की दूर जाती जाएगी
    रफ़्ता रफ़्ता ये बदन बे-जान होता जाएगा

    अजनबी लोगों की दिल पर धाक बढ़ती जाएगी
    अपने ही घर में कोई मेहमान होता जाएगा

    पासबानों के हवाले बस्तियाँ होंगी अगर
    जागने का रात भर एलान होता जाएगा

    हिज्र का आलम उड़ा ले जाएगा रंगत कहीं
    और समुंदर सूख कर मैदान होता जाएगा

    रात होने दो यहाँ पर बरहनाई छाएगी
    वो हवस में देखना हैवान होता जाएगा
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    Dinesh Kumar Drouna
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    ख़ुद से ख़ुदी के ऐब छुपाना फ़ुज़ूल है
    यूँ आईने को आँख दिखाना फ़ुज़ूल है

    एहसास को मज़ाक़ बनाना फ़ुज़ूल है
    तुम को तो दिल की बात बताना फ़ुज़ूल है

    पानी से दिल की आग बुझाना फ़ुज़ूल है
    ऐ शख़्स आँसुओं में नहाना फ़ुज़ूल है

    मुमकिन है नींद नींद न हो कर बहाना हो
    वो सो नहीं रहा तो जगाना फ़ुज़ूल है

    उस ने जो ठान ही ली अगर ख़ुद-कुशी की तो
    फिर तो उसे उसी से बचाना फ़ुज़ूल है

    हम लाख तजरबों से यही कह रहे हैं अब
    इक-तरफ़ा रब्त हो तो निभाना फ़ुज़ूल है

    जल्वा-नुमा हैं आप अगर ख़्वाब ही में तो
    फिर तो हमारा होश में आना फ़ुज़ूल है

    है ये तक़ाज़ा रस्म-ए-अदब का वगर्ना तो
    मैं जानता हूँ हाथ मिलाना फ़ुज़ूल है
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    Dinesh Kumar Drouna
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    आप और आप का असर दोनों
    कर गए हम को दर-ब-दर दोनों

    दोनों तन्हाइयों के मारे थे
    इस लिए भी हैं हम-सफ़र दोनों

    एक बिस्तर है बीच में तकिया
    कैसे सोएँगे रात भर दोनों

    बात बढ़ने की ये वजह भी थी
    बात करते थे मुख़्तसर दोनों

    आप आए भी और चले भी गए
    झूठ लगती हैं ये ख़बर दोनों
    इश्क़ से लोग बे-ख़बर रहते
    साथ मरते नहीं अगर दोनों

    एक बच्ची ग़रीब और अन-पढ़
    इस परी के नहीं हैं पर दोनों

    दो गुनी कर रहे थे ख़ुशियों को
    एक दूजे को बाँट कर दोनों

    कैसे मुँह को फुलाए बैठे हैं
    एक-दूजे की बात पर दोनों

    बंद करते ही आँख आने लगे
    एक-दूजे को अब नज़र दोनों
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    Dinesh Kumar Drouna
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Amjad Islam AmjadAmjad Islam AmjadKafeel Aazar AmrohviKafeel Aazar AmrohviMeraj FaizabadiMeraj FaizabadiEhtisham AkhtarEhtisham AkhtarAhmad MushtaqAhmad MushtaqShakeel JamaliShakeel JamaliWaseem BarelviWaseem BarelviFakhira batoolFakhira batoolYagana ChangeziYagana ChangeziSubhan AsadSubhan Asad