आँख शीशा शुमार होती है
आँख तब ऐतिबार होती है
आँख क्यूँ देखती है आँखों को
आँख ही जब शिकार होती है
तुम तो कहते थे हम पे मरते हो
मौत क्या बार बार होती है?
— Avinash Chaudhary
आँख तब ऐतिबार होती है
आँख क्यूँ देखती है आँखों को
आँख ही जब शिकार होती है
तुम तो कहते थे हम पे मरते हो
मौत क्या बार बार होती है?
Other ghazal from the same pen
Shers of qabr.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling