वही लिखता हूँ जो लिखने को कहा जाता है
बस समझदारों के पढ़ने में नहीं आता है
क्यूँ भला गहरे हरे वन मेरा मन खींचते हैं
क्या मेरा वाकई क़ुदरत से कोई नाता है
जब किसी और में कुछ ढूँढ़ती है मेरी निगाह
एकदम से तू मेरे सामने आ जाता है
— Waseem Barelvi
बस समझदारों के पढ़ने में नहीं आता है
क्यूँ भला गहरे हरे वन मेरा मन खींचते हैं
क्या मेरा वाकई क़ुदरत से कोई नाता है
जब किसी और में कुछ ढूँढ़ती है मेरी निगाह
एकदम से तू मेरे सामने आ जाता है
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