हमें अभी तक नहीं मिला रात का सितारा
अभी यहीं थी ज़मीन अभी खो गया किनारा
बड़े ही मुद्दत के बा'द हम घर में चैन से थे
किसी की आवाज़ ने हमें आज फिर पुकारा
हमें पता ही नहीं चला और हो गया ये
किसी ग़मों ने हमें रुलाया नहीं दोबारा
हमें लगा था कि कुछ न कुछ फ़ाइदा करेगा
मगर तेरी याद ने दिया है बड़ा खसारा
हमारे घर की छतें टपकती रही हमेशा
नहीं मिला आज तक किसी रंग का सहारा
तेरी किसी बात पर हमें डर लगा बहुत ही
इसीलिए अब हमें न हो बात वो गवारा
'विशेष' तू किस तरह से ये जंग हार आया
खड़ा मिला था रक़ीब जो सामने हमारा
— Vishesh asthana















