सारे सितारों के हमीं तन्हा रक़ीब थे
हम एक शब तो चाँद के इतने क़रीब थे
हाथों को ये गिला हैं बड़े कम-नसीब हम
आँखें ये सोचती हैं कि हम ख़ुश-नसीब थे
रक्खी है आप ही के लिए जाँ सँभाल कर
यूँ शहर में कुछ और भी हुस्न-ए-सलीब थे
हम में ही कुछ कमी थी जो समझे न जा सके
वर्ना हमारे दोस्त तो सारे अदीब थे
हैरान हैं हम आइने में ख़ुद को देख कर
जानाँ तुम्हारे शौक़ भी कितने अजीब थे
— Vineet Aashna















