फ़ैसला उस पार या इस पार होना चाहिए
क्यूँ जुनून-ए-इश्क़ को मँझधार होना चाहिए
फूल सारे ही चमन के दाद के हैं मुस्तहिक़
इश्क़ आख़िर क्यूँ फ़क़त इक बार होना चाहिए
इश्क़ का इज़हार इतना और अमल कुछ भी नहीं
आप का तो नाम ही सरकार होना चाहिए
मैं नहीं तो क्या हज़ारों और तारे हैं यहाँ
क्यूँ किसी भी रात को बेज़ार होना चाहिए
उम्र भर आँखों ने तेरे हिज्र में रोज़ा रखा
ज़िंदगी की शाम है इफ़्तार होना चाहिए
तुझ को माँगा जब दुआ में हँस के ये बोले ख़ुदा
ज़िंदगी में कुछ न कुछ दुश्वार होना चाहिए
'आश्ना' कुछ काम करते हो तो हो किस काम के
तुम तो शाइ'र हो तुम्हें बे-कार होना चाहिए















