तेरा बंदा चला गया मालिक

ये तो काफ़ी बुरा हुआ मालिक

तू ने दुनिया बता के भेजा था
मैं जहन्नम में आ गया मालिक

तेरे जैसों की होती थी दुनिया
मेरे जैसों का कौन था मालिक

किन ग़मों में उलझ गया था मैं
कह रहा था कि शुक्रिया मालिक

सारे नौकर बहुत परेशाँ थे
ये ख़बर थी कि मर गया मालिक

हाँ ये सच है कि मैं तसव्वुर हूँ
इस तसव्वुर का दायरा मालिक

तू मेरा दुख नहीं समझता है
तू भी इंसान हो गया मालिक

मैं ने बस उस के लब ही देखे थे
हो गया था बहुत ख़फ़ा मालिक

अब तो मैं तेरे काम का हूँ बस
मुझ
में अब कुछ नहीं बचा मालिक

मैं ने वीरान कर लिया ख़ुद को
मुझ
में आबाद हो गया मालिक

एक ही हैं तेरे मेरे ग़म भी
एक ही है तेरा मेरा मालिक

— Vikram Gaur Vairagi

More by Vikram Gaur Vairagi

Other ghazal from the same pen

See all from Vikram Gaur Vairagi →

Duniya Shayari

Shers of duniya.

All Duniya Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling