सच देखा है सच क्या है
सिर्फ़ नज़र का धोखा है
खेल तो सारा उस का है
जिस ने पासा फेंका है
पीछे चलने वाले ने
कुछ आगे का सोचा है
झूठ ही आख़िर सच निकले
ये भी तो हो सकता है
तन्हा क्यूँ रहते हैं आप
इतना क्या मन लगता है
तुम को मोहब्बत आती थी
लड़ना तुम ने सीखा है
रौशनी करनी पड़ती है
और अँधेरा होता है
सब कुछ छोड़ रहे हो तुम
वैरागी ये सब क्या है
— Vikram Gaur Vairagi















