मुझ को जीना है इस बदन के साथ
और उस पे भी पूरे मन के साथ
वन में जाते नहीं हैं मन के साथ
मन चला जाता है हिरन के साथ
जीते रहने में दम घुटेगा मगर
जीते रहिए इसी घुटन के साथ
— Vikram Gaur Vairagi
और उस पे भी पूरे मन के साथ
वन में जाते नहीं हैं मन के साथ
मन चला जाता है हिरन के साथ
जीते रहने में दम घुटेगा मगर
जीते रहिए इसी घुटन के साथ
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