सोचना भी अजीब आदत है
ये भी तो सोचने की सूरत है
मैं किसी दूसरे का सौदा हूँ
आप के पास मेरी क़ीमत है
पहले हँसने पे भी न राज़ी थे
अब उदासी से भी शिकायत है
अब मुझे आप छोड़ जाइएगा
अब मुझे आप की ज़रूरत है
आप का हाथ माँगता हूँ मैं
आप के हाथ मेरी किस्मत है
मेरी सिगरेट पे ऐतराज़ तुम्हें
क्या मुझे चूमने की हसरत है
मौत तो पहला मरतबा है फ़िक्र
ज़िन्दगी दूसरी सहूलत है
— Vikas Rana















