जितने लोग शहर में हैं
एक मुसलसल डर में हैं
मंज़िल पीछे छूट गई
फिर भी लोग सफ़र में हैं
सिर्फ़ मिरे क़दमों के निशाँ
मेरी राह-गुज़र में हैं
उन से उत्तर क्या पूछा
प्रश्न कई उत्तर में हैं
ख़ैर तो है 'विज्ञान' मियाँ
काफ़ी दिन से घर में हैं
— Vigyan Vrat
एक मुसलसल डर में हैं
मंज़िल पीछे छूट गई
फिर भी लोग सफ़र में हैं
सिर्फ़ मिरे क़दमों के निशाँ
मेरी राह-गुज़र में हैं
उन से उत्तर क्या पूछा
प्रश्न कई उत्तर में हैं
ख़ैर तो है 'विज्ञान' मियाँ
काफ़ी दिन से घर में हैं
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