चलते रहना निरास हो कर भी
मुस्कुराना उदास हो कर भी
लिख दिया आँख को नदी उस के
मर गए प्यासे पास हो कर भी
सुनता है कौन सच यहाँ अब तो
बोलना झूठ ख़ास हो कर भी
मेरे जैसा मिला नहीं कोई
गिनती पूरे पचास हो कर भी
— Vedic Dwivedi
मुस्कुराना उदास हो कर भी
लिख दिया आँख को नदी उस के
मर गए प्यासे पास हो कर भी
सुनता है कौन सच यहाँ अब तो
बोलना झूठ ख़ास हो कर भी
मेरे जैसा मिला नहीं कोई
गिनती पूरे पचास हो कर भी
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