किसी के मरहले का हल नहीं है
तो फिर ये क़ाएदे का हल नहीं है
यहाँ उम्मीद का सूरज उगाओ
दिया इस ताकचे का हल नहीं है
ये लड़की जान है साहब हमारी
ये लड़की बिस्तरे का हल नहीं है
तो क्या हम यूँॅं ही तड़पेंगे मुसलसल
तो क्या इस वसवसे का हल नहीं है
हमारा एक ही तो मसअला है
हमारे मसअले का हल नहीं है
— Vashu Pandey















