हर मंज़र पर जश्न मनाने नाचने गाने वाले लोग

इक मुद्दत से चुप बैठे हैं शोर मचाने वाले लोग

हम दोनों को समझाऍंगे डॉंटेंगे फटकारेंगे
हम दोनों को कब समझेंगे ये समझाने वाले लोग
इश्क़ क़ैस फ़रहाद रोमियो जैसे ही कर सकते हैं
हम तो ठहरे दस से छह तक ऑफ़िस जाने वाले लोग

कुछ चीज़ों का इस दुनिया में कोई नेमुल बदल नहीं है
कैसे चाँद से काम चलाऍं तुझ को देखने वाले लोग

— Vashu Pandey

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