हालात इस कदर न थे दुश्वार ठीक थे
चारागरी से क़ब्ल ये बीमार ठीक थे
बेकार हो गए हुए हैं जब से कार-गर
इस से तो मेरी जान हम बेकार ठीक थे
उस पार लग रहा था कि इस पार मौज है
इस पार सोचते हैं कि उस पार ठीक थे
थे यूँ भी अपने चाहने वाले बहुत कि हम
इंसान तो जैसे भी थे फ़नकार ठीक थे
— Vashu Pandey















