बड़े बुज़दिल हैं लेकिन फिर भी हिम्मत कर रहे हैं हम

तुम्हारे शहर में रह कर मोहब्बत कर रहे हैं हम

अभी तक ठीक से आई नहीं है धुन मोहब्बत की
गुज़िश्ता सात जन्मों से रियाज़त कर रहे हैं हम

तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के
कोई तुम से कहे तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम

वगरना जिस को छोड़ा है, उसे मुड़कर नहीं देखा
ग़नीमत जान के तुझ से शिकायत कर रहे हैं हम

मेरे रोने से ख़ाहिफ़ हैं मगर क्या इस से वाक़िफ़ हैं
कि ये मातम भला किस की बदौलत कर रहे हैं हम

— Vashu Pandey

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