ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है

मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है

दग़ा भी दूँगा प्यार में कभी कभी
कि ये मिरा उसूल है क़ुबूल है

तुझे जहाँ अज़ीज़ है तो छोड़ जा
मुझे ये शय फ़ुज़ूल है क़ुबूल है

तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं
जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है

लिपट ऐ शाखे गुल मगर ये सोच कर
मेरा बदन बबूल है क़ुबूल है

यही है गर तिरी रज़ा तो बोल फिर
क़ुबूल है क़ुबूल है क़ुबूल है

— Varun Anand

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