ख़ुद अपने ख़ून में पहले नहाएा जाता है

वक़ार ख़ुद नहीं बनता बनाया जाता है

कभी कभी जो परिंदे भी अन-सुना कर दें
तो हाल दिल का शजर को सुनाया जाता है

हमारी प्यास को ज़ंजीर बाँधी जाती है
तुम्हारे वास्ते दरिया बहाएा जाता है

नवाज़ता है वो जब भी अज़ीज़ों को अपने
तो सब से बा'द में हम को बुलाया जाता है

हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को
हमीं को बा'द में रास्ता दिखाया जाता है

— Varun Anand

More by Varun Anand

Other ghazal from the same pen

See all from Varun Anand →

Dariya Shayari

Shers of dariya.

All Dariya Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling