हम से बढ़ कर कोई प्यारा भी नहीं था उस को
और एहसास हमारा भी नहीं था उस को
उम्र भर ताना दिया धोका-दही का उस ने
मैं ने ये तीर तो मारा भी नहीं था उस को
पेश करदा मेरे आँसू भी वो रख लेता था
वरना दरकार सितारा भी नहीं था उस को
किस मोहब्बत से मेरे साथ निभाया उस ने
वो तअल्लुक़ जो गवारा भी नहीं था उस को
अपनी मर्ज़ी से बिगाड़ा तो क्या था 'ज़ोरेज़'
अपनी मर्ज़ी से सँवारा भी नहीं था उस को
— Usama Zoraiz















