उसी मोड़ पर फिर से आ कर खड़ा हूँ
जहाँ प्यार में भी ख़ुदी मैं अड़ा हूँ
मुझे रूठना है उसी की तरह तो
मगर ये न कहना के मैं अब बड़ा हूँ
छलकता हूँ ग़ज़लें तो लगता है जैसे
भरा सा किसी का कोई मैं घड़ा हूँ
मुझे देख दुनिया में आ कर गिरा हूँ
ख़ुदा के मैं दामन से जैसे झड़ा हूँ
समय का बड़ा खेल है तुम भी देखो
जहाँ था कभी मैं वहीं अब खड़ा हूँ
— Toyesh prakash















