चहरे तमाम तुम ये शहर भर के देख लो

मिल जाएँ हम कहीं तो ठहर कर के देख लो

जिस मोड़ तक हमारी ये राहें न हों जुदा
उस मोड़ तक ही साथ सफ़र कर के देख लो

ये रात भी हसीं हैं अगर हो नहीं यक़ीं
तो आज मेरे साथ बसर कर के देख लो

इक बार तो उठा लो मोहब्बत की इक नज़र
इक बार तो निगाहें इधर कर के देख लो

जो है नहीं तुम्हारा उसे भूल जाओ तुम
जो है तुम्हारा उस की क़दर कर के देख लो

तुम कर रहे हो जो ये मोहब्बत की आरज़ू
अंजाम तो बुरा है मगर कर के देख लो

वो इंतिज़ार में हैं के 'हैदर' मिलोगे तुम
उन की गली से आज गुज़र कर के देख लो

— Haider Khan

More by Haider Khan

Other ghazal from the same pen

See all from Haider Khan →

Safar Shayari Collection

Shers of safar shayari collection.

All Safar Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling