कर रहे हैं सिसकने की आवाज़
आ रही है चहकने की आवाज़
ख़ामुशी सी है ख़ामुशी नहीं है
हल्क़ में बात अटकने की आवाज़
सुन कि भँवरे के पंख करते हैं
किसी गुल के महकने की आवाज़
काम लोरी का कर गई आख़िर
रात भर छत टपकने की आवाज़
कोई राम आएँ तो सुनें 'फ़ानी'
इस शिला में धड़कने की आवाज़
— Ananth Faani















