हर वाक़िए में है मुझे अश'आर की तलाश
जैसे हो एक बनिये को व्यापार की तलाश
बाक़ी किसी मुआमले की कुछ नहीं पड़ी
कीजे ग़ज़ल में आप फ़क़त प्यार की तलाश
बीमार को फिर आइने में चारा-गर मिला
या'नी इक उम्र भर की थी बेकार की तलाश
दीवानगी है क्या है पता भी नहीं मुझे
पर सर को रोज़ है नए दीवार की तलाश
कर पाए जो अदा तेरे किरदार को 'अनन्त'
जारी है अब भी ऐसे अदाकार की तलाश
— Ananth Faani















